सादगी और आत्म-सम्मान (प्रेरक प्रसंग)

यह प्रसंग उस समय का है जब गांधीजी देश को आजाद कराने के आंदोलन में पूरी तरह सक्रिय थे। एक बार एक धनी बैरिस्टर (वकील) गांधीजी से मिलने उनके आश्रम आए। वे गांधीजी के विचारों से बहुत प्रभावित थे और उनके साथ देश सेवा में जुड़ना चाहते थे।
जब वे आश्रम पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि गांधीजी खुद एक कोने में बैठकर गेहूं साफ कर रहे थे। बैरिस्टर साहब महंगे और साफ-सुथरे कपड़ों में थे। गांधीजी ने मुस्कुराकर उनका स्वागत किया और बात करते-करते गेहूं की परात उनकी ओर बढ़ाते हुए कहा, “बैरिस्टर साहब! बातें तो होती रहेंगी, जरा इस गेहूं को साफ करने में मेरी मदद कीजिए।”
बैरिस्टर साहब सोच में पड़ गए। उन्होंने जीवन में कभी ऐसा छोटा काम नहीं किया था, लेकिन गांधीजी के सामने वे मना नहीं कर सके। उन्होंने झिझकते हुए गेहूं साफ करना शुरू किया। कुछ ही देर में उन्हें समझ आ गया कि गांधीजी ने बिना एक शब्द कहे उन्हें ‘श्रम के सम्मान’ (Dignity of Labor) का पाठ पढ़ा दिया है।
सीख: कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। वास्तविक महानता अहंकार को छोड़कर जमीन से जुड़े रहने में है।

यह भी पढ़ें  साथी

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top