मार्च, 2024

गुरुग्राम, हरियाणा
कहा जाता है कि जीवन में सफल होने के लिए आत्म-निरीक्षण एवं आत्म-परीक्षण बहुत आवश्यक है। कहावत है यदि आप एक उंगली किसी की ओर उठाते हैं तो तीन उंगलियां मुड़कर आपकी ओर उठती है। दूसरों के अवगुणों की ओर हमारा ध्यान तुरंत जाता है परंतु हम अपने अवगुणों को नहीं देखते। कबीर दास जी ने खूब कहा है “बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय, जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा ना होय” अर्थात मैं जब दूसरों के अवगुण देखने चला तो मैंने पाया कि मेरे में औरों से अधिक अवगुण है।
अफसोस! जितना प्रयत्न हम दूसरों को जानने या उनके विषय में अपनी विचारधारा बनाने में करते हैं उतना अपने आपको जानने में करें तो जीवन सफल हो जाएगा। दूसरों को जानने से पहले स्वयं को जानना अति आवश्यक है। आपको अपने गुण अवगुण का ज्ञान होना चाहिए। आत्मनिरीक्षण के उपक्रम में मानव के स्वभाव में प्रखरता आती है सद्गुणों में वृद्धि होती है और व्यक्तित्व में निखार आता है। जब आप जीवन के प्रत्येक भाग को ध्यान पूर्वक देखते हैं, कहां क्या कमी है? इसका विश्लेषण और सुधार करते हैं तो आप जीवन में और सफल होते हैं। आत्म-निरीक्षण करने वाले व्यक्ति का दृष्टिकोण ही बदल जाता है उसका ध्यान दूसरों के गुणों पर अधिक और दोषों पर कम जाता है। अपनी निंदा और आलोचना होने पर भी जिन व्यक्तियों ने तटस्थ भाव अपनाया है और गुण ग्राहक प्रवृत्ति को अपनाया है वह जीवन में अधिक सफल रहे है।
उन्होंने अपने साथ-साथ दूसरों का भी कल्याण किया है। सृष्टि में गुण है तो दोष भी, गुलाब है तो कांटे भी, जो मनुष्य इस बात को स्वीकार कर लेता है और परछिद्रान्वेषन में अपनी शक्ति और समय को व्यर्थ नहीं गंवाता, उसके अनेक मित्र होते हैं और वह जीवन का आनंद अधिक उठाता है। आत्म निरीक्षण व्यक्तिगत ज्ञान का बड़ा स्रोत हो सकता है इसमें हमारे प्रतिदिन किए जाने वाले कर्मों का लेखा-जोखा भी आता है। हमारे किसी क्रियाकलाप से किसी का कोई अहित तो नहीं हो रहा? इस बात का ध्यान रखना चाहिए क्या हम सदा अपने विषय में ही सोचते हैं? आत्म केंद्रित तो नहीं होते जा रहे? इन प्रश्नों को स्वयं से पूछते रहना भी आत्मनिरीक्षण है।
इससे आत्म जागरूकता का उच्च स्तर प्राप्त होता है जो मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और हमारी खुशी बढ़ाने में मदद करता है। आत्मनिरीक्षण, आत्मज्ञान हमें घमंड से दूर रखता है हम स्वयं अपनी कमजोरी का पता लगाकर उन्हें दूर कर सकते हैं जो हमें न केवल जीवन पथ पर आगे बढ़ाने में सहायक होगा अपितु औरों के साथ हमारे संबंध भी सुधारेंगे। अत: आज से ही आत्मनिरीक्षण एवं आत्मपरीक्षण की आदत बनायें।

