गलत सवाल (लघुकथा)

मार्च, 2024

डॉ राजकुमार निजात
सिरसा (हरियाणा)

उस आदमी ने पूछा, “तुम गलियों में क्यों फिर रही हो?”
गाय बोली, “मैं अपने चारे की तलाश में इधर-उधर भटक रही हूँ। तुम लोग मेरी भूख की तरफ कुछ ध्यान ही नहीं देते?”
गाय का प्रतिउत्तर सुनकर वह व्यक्ति झेंप गया। तब गाय ने ही पूछा, “तुम यहाँ धूप में क्यों बैठे हो?”
“कड़ाके की ठंड है। तुम देख नहीं रही मैं धूप सेंक रहा हूँ?”
“तुम केवल धूप सेंक रहे हो। मैं एक समय में दो काम कर लेती हूँ। अपने चारे की तलाश कर लेती हूँ और धूप भी सेंक लेती हूँ। काश! तुम लोग अपनी भूख की व्यवस्था के साथ-साथ हमारी भूख की व्यवस्था भी कर देते? मैं चारा खाती हूँ तो तुम्हारे लिए दूध भी देती हूँ। तुम भोजन करते हो तो क्या देते हो?” गाय ने उस आदमी के चेहरे को भाँपते हुए पूछा।
सवाल करने वाला व्यक्ति अब नदारद था।
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