रसोई के डॉक्टर्स (सेहतनामा)

मार्च, 2023
सर्दी खत्म हो रही है और वसंत का सुहाना ऋतु आ रहा है (वसंत की सुहानी ऋतु आ रही है)। प्रकृति का नव-शृंगार इस समय मन को एक अनजाना-सा आनंद देता है। लेकिन साथ ही मौसम का यह परिवर्तन हमारे स्वास्थ्य पर कुछ प्रतिकूल प्रभाव भी डालता है। प्रकृति का नियम है— जहाँ समस्या होती है, वहाँ समाधान भी होता है; जहाँ बीमारी होती है, वहाँ इलाज भी होता है। तो क्यों न डॉक्टर के पास जाने से पहले हम अपने आसपास के ऐसे ‘प्राकृतिक डॉक्टर्स’ से सहायता लें! आज इस आलेख में हम कुछ ऐसी वस्तुओं के चिकित्सीय गुणों के विषय में बात करेंगे, जो हम सबकी रसोई में सामान्य रूप से पाई जाती हैं। ये सर्वसुलभ होने के साथ-साथ सस्ती भी होती हैं और इनका कोई साइड-इफेक्ट भी नहीं होता। तो आइए, जानते हैं रसोई की ऐसी ही कुछ वस्तुओं के विष

य में:


हल्दी हल्दी के बिना तो किसी भारतीय रसोई का काम चल ही नहीं सकता। साथ ही, शायद ही कोई भारतीय हो जिसने कभी यह सलाह न सुनी हो कि ‘दूध में हल्दी डालकर पी लो’ या ‘चोट पर हल्दी की पट्टी बाँध लो’ इत्यादि। सौंदर्य-प्रसाधन के रूप में भी इसका उपयोग होता है। यहाँ तक कि शादियों में एक रस्म ही हल्दी लगाने की होती है। यानी इसके औषधीय गुणों से लगभग सभी आम या ख़ास भारतीय परिचित होते हैं। यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Immune system) को बढ़ाती है। साथ ही यह संक्रमण-रोधी (Antiseptic and antimicrobial) भी होती है। इसीलिए किसी घाव, कटने या छीलने से लेकर सर्दी-खाँसी तक में इसका प्रयोग किया जाता है। इसमें दर्द-निवारक गुण भी होते हैं।
प्रयोग का तरीका: संक्रमण रोकने के लिए नारियल तेल के साथ मिलाकर इसे घाव पर लगाना चाहिए। रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए दूध, पानी, अदरक और काली मिर्च के साथ मिलाकर पीना अधिक फायदेमंद होता है।
नमक नमक खाने में तो स्वाद भर ही देता है, कई शारीरिक समस्याओं से बचाव में भी काम आता है। दाँत दर्द में गुनगुने पानी में नमक डालकर कुल्ला करना और टॉन्सिल में गुनगुने पानी से गरारे (gargle) करना इसका सबसे सामान्य उपयोग है। गरारे करने के लिए पानी में नमक की मात्रा एक गिलास पानी में कम से कम आधा बड़ा चम्मच (टेबल स्पून) रखें, क्योंकि नमक और पानी का घोल जितना सांद्रित (concentrated) होगा, परासरण (osmosis) की प्रक्रिया द्वारा टॉन्सिल की सूजन को उतनी ही जल्दी कम करेगा। नमक देर से गरम और देर से ठंडा होता है; इसलिए चोट या गिल्टी की स्थिति में नमक की पोटली से सिकाई करने की सलाह भी दादी-नानी देती थीं।
लहसुन लहसुन में एलीन (Alliin) नामक तत्त्व पाया जाता है, जो एलीसीन (Allicin) नामक तत्त्व में परिवर्तित हो जाता है। एलीसीन सल्फर का एक यौगिक/अपरूप होता है। इसी के कारण लहसुन में विशेष प्रकार के औषधीय गुण पाए जाते हैं। यह शरीर को डिटॉक्स करने का सबसे सरल प्राकृतिक उपाय है। शरीर के अंदर के हानिकारक कृमि और जीवाणुओं (bacteria) को यह नष्ट करता है। यह दर्द और घाव के फैलाव को रोकने में भी कारगर होता है। लहसुन के प्रयोग का तरीका भी सरल है— इसे कुचलकर सब्ज़ी या दाल में मिलाकर पकाने से या कच्चा खाने से भी इसके औषधीय गुणों का लाभ मिल सकता है। पलकों पर गुहेरी या बिलोनी (stye) होने पर वहाँ लहसुन की छीली हुई कली को दबाने से आराम मिलता है।
अदरक इसका स्वाद और सुगंध तो लाजवाब होते ही हैं, इसके औषधीय गुण भी बेमिसाल हैं। यह सूजन व जलन (Anti-inflammatory) और दर्द (Analgesic) कम करने में बहुत उपयोगी होता है। इसे पकाने पर इसके बायो-एक्टिव कंपाउंड्स टूटकर शोगोल (Shogaols) नामक तत्त्व बनाते हैं। यह ज़ुकाम में लाभकारी होता है। इसमें ख़ून को पतला करने का गुण भी होता है; इसलिए जिन्हें ख़ून का थक्का बनने की समस्या हो या स्ट्रोक हुआ हो, उनके लिए अदरक बहुत अच्छा माना जाता है। अदरक पाचन क्रिया को ठीक रखने में भी सहयोगी है। इसे काटकर, कुचलकर या पीसकर गर्म पानी, चाय या सब्ज़ी में डालकर आसानी से प्रयोग किया जा सकता है। सर्दी-ज़ुकाम में शहद और काली मिर्च के साथ मिलाकर अदरक का रस लेना या काढ़े में मिलाकर पीना फ़ायदेमंद होता है।
काली (गोल) मिर्च काली मिर्च में पिपराइन (Piperine) नामक एक विशेष तत्त्व पाया जाता है। इस तत्त्व का मुख्य काम यह है कि यह शरीर द्वारा भोजन के माध्यम से मिलने वाले पोषक तत्त्वों के अवशोषण की क्षमता को बढ़ा देता है। साथ ही, यह शरीर में थर्मोजेनेसिस (Thermogenesis) की प्रक्रिया— यानी शरीर द्वारा आंतरिक ऊष्मा उत्पन्न करने की क्षमता को भी बढ़ा देता है, जिससे उपापचय (metabolism) बेहतर होता है। आशय यह है कि काली मिर्च स्वयं शरीर को कोई विशेष पोषक तत्त्व नहीं देती, लेकिन यह शरीर की उस क्षमता को बढ़ा देती है जिससे वह भोजन से मिलने वाले पोषक तत्त्वों का बेहतर उपयोग कर सके। इसका परिणाम यह होता है कि इसके उपयोग से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर गरम रहता है। भोज्य पदार्थों, गुनगुने पानी या चाय में साबुत या पाउडर के रूप में मिलाकर इसका उपयोग किया जा सकता है।
जीरा छोटे-से जीरे में बड़ी मात्रा में सूक्ष्म पोषक तत्त्व पाए जाते हैं। सूक्ष्म पोषक तत्त्व वे खनिज (minerals) होते हैं जो शरीर को बहुत कम मात्रा में चाहिए होते हैं, लेकिन इनकी कमी से शरीर की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। जीरे में आयरन, कॉपर, कैल्शियम, पोटैशियम, मैंगनीज़, जिंक एवं मैग्नीशियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्त्व पाए जाते हैं। इतना ही नहीं, यह विटामिन E, A, C और B-कॉम्प्लेक्स का भी अच्छा स्रोत है। फ़ाइबर और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के कारण इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है। यही कारण है कि मांसपेशियों के दर्द, आँखों की समस्याओं और पाचन संबंधी दिक्कतों में जीरे का उपयोग बहुत फ़ायदेमंद होता है।
प्रयोग का तरीका:
पानी या छाछ में एक छोटा चम्मच भुने जीरे का पाउडर मिलाकर पीने से पाचन संबंधी समस्याएँ दूर होती हैं।
पानी में एक चुटकी भुना जीरा पाउडर, थोड़ी अदरक, सेंधा नमक और आधा चम्मच सौंफ़ डालकर उबालने के बाद ठंडा करके पीने से कब्ज़ और महिलाओं को पीरियड के दौरान होने वाले दर्द से राहत मिलती है।
जीरा-पानी उबालकर उसे ठंडा करके पिलाने से छोटे बच्चों के पेट दर्द में आराम मिलता है।
गरम दूध में मिलाकर पीना एनीमिया से ग्रस्त महिलाओं और प्रसव के बाद माताओं के लिए बहुत लाभप्रद होता है, क्योंकि इसमें आयरन और कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है।
शरीर का वज़न और कोलेस्ट्रॉल कम करने, याददाश्त बढ़ाने तथा अच्छी नींद लाने इत्यादि अनेक लाभों के लिए भी इसका अलग-अलग तरीकों से प्रयोग किया जाता है।
अगर आँखों में चोट लगी हो या जलन हो रही हो, तो जीरे को हाथों से हल्का मसल लें ताकि उसकी डंठल हट जाए। फिर उसे साफ़ पानी से धोकर ठंडे पानी में भीगने के लिए डाल दें। कुछ घंटे बाद साफ़ कपड़े से छानकर उस पानी से आँखें धोने/छिड़कने पर आराम मिलता है।
(यह सामान्य जानकारी के लिए है, कोई चिकित्सीय सलाह नहीं।)

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