सितंबर, 2022

अब हम तो चले कर्तव्य के पथ पर
प्रिय तुम भी साथ निभा देना
जब ठोकर खा मै गिर जाऊँ बस अपना हाथ बढ़ा देना..
तुम शान्ति स्वरूपा शक्ति हो
इसका आभास दिला देना
जब वक्त परे भूमण्डल को
अपना प्रतिभाव दिखा देना
अब हम तो चढ़े कर्तव्य के रथ पर
तुम अपना धर्म निभा लेना
जब दल-दल बीच मैं फँस जाऊँ
बस आकर हाथ बढ़ा देना..
तूँ सीता की प्रतिबिम्ब हो
इतना अभिप्राय बता देना
संघर्ष अधुरा रहे ना मेरा
थोड़ा-सा कष्ट उठा लेना
जब कर ही दिये सर्वस्व समर्पण
तुम अपना कर्ज चुका लेना
जब वीर गति मैं पा जाऊँ
बस आकर गले लगा लेना..
बस आकर हाथ बढ़ा देना..
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