सितंबर, 2022

दिल्ली
मात पिता तुम गुरुवर मेरे शत-शत तुम्हें प्रणाम।
जो कुछ मेरा सब कुछ तेरा
तुमसे ही है रैन बसेरा
तुम्हीं ने दिया है नाम
मातु पिता तुम गुरुवर मेरे शत शत तुम्हें प्रणाम
माँ ने हमको जन्म दिया है
असीम कष्ट सहन किया है।।
पिता हमारे पालनकर्ता कभी न किए आराम।।
मात पिता तुम गुरुवर मेरे शत शत तुम्हें प्रणाम।।
सोई कब तू जागी मैया
चलाती रही परिवारिक नैय्या।।
स्नेह बरसाई तब भी हंसकर
कितना करूं बखान।।
मात पिता तुम गुरुवर मेरे शत शत तुम्हें प्रणाम।।
सब रिश्ता में स्वार्थ छिपा है
हर रिश्ता पर दाम लिखा है।।
तू असीम प्यार की सागर मैया
तेरे स्नेह का न कोई दाम।।
मात पिता तुम गुरुवर मेरे शत शत तुम्हें प्रणाम।।
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