घर में है देवतुल्य बुजुर्ग हमारे

सितंबर, 2022

विमल जी मिश्र
दिल्ली

घर में है देवतुल्य बुजुर्ग हमारे
चरणों में है चारों धाम … प्यारे
सेवा करो सुबहो-शाम
प्यारे सेवा करो सुबहो शाम।
वृद्ध के आशीर्वाद से चमके सितारे
बनते हैं सब बिगड़े काम … प्यारे
सेवा करो सुबहो शाम,
प्यारे सेवा करो सुबहो शाम।
बचपन में अंगुली पकड़ के चलाया
पढ़ना और लिखना सिखाया।
दुःख तकलीफ़ों से हमको बचाकर
पद और प्रतिष्ठा दिलाया।
उनके जो आँसू ना पोछोगे यारो
धिक्कारेगा सारा जहान …. प्यारे
सेवा करो सुबहो शाम
प्यारे सेवा करो सुबहो शाम।
सुख से तुम रहते परिवार के संग
वृद्धों को रखते हो आश्रम।
जिसने सहा कष्ट तेरे लिए ही
अब देते हो उनको तुम्हीं ग़म।
रोएगा आत्मा जब उनका कभी भी
आएगा कुछ भी ना काम…. प्यारे
सेवा करो सुबहो शाम
प्यारे सेवा करो सुबहो शाम।
तेरे लिए जिसने सपना है देखा
देते हो उनको तुम धोखा।
जैसा करोगे तुम वैसा भरोगे
ईश्वर के पास है सब लेखा।
करम जब श्रवण के जैसा करोगे
युग युग में चमकेगा नाम …. प्यारे
सेवा करो सुबहो शाम
प्यारे सेवा करो सुबहो शाम।
घर में है देवतुल्य बुजुर्ग हमारे
चरणों में है चारों धाम … प्यारे
सेवा करो सुबहो शाम।
प्यारे सेवा करो सुबहो शाम।
वृद्ध के आशीर्वाद से चमके सितारे
बनते हैं सब बिगड़े काम … प्यारे
सेवा करो सुबहो शाम
प्यारे सेवा करो सुबहो शाम।
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