दिसंबर, 2022

बेल, सीतामढ़ी, बिहार
वृद्ध खुद को अकेला पाता है, जब वृद्धावस्था आती है।-2
अपना दुःख-दर्द छिपाता है, जब वृद्धावस्था आती है।।
दिन-रात तनाव में जीते हैं, घुट-घुट कर दर्द को पीते हैं।-2
जब जीवन-2 नीरस हो जाता है, तब कुछ भी समझ नहीं आता है।।
अपना दुःख दर्द छिपाता है, … … …।
जब रोग-व्याध से घिर जाते, रिश्ते-नाते सब फिर जाते।-2
हर-पल -2 वो आंसू बहाता है, अंतिम पड़ाव जब आता है।।
अपना दुःख-दर्द छिपाता है, … … …।
वृद्धावस्था दुखदायी है, न कोई साथी, न भाई है।-2
मन सीता-2 राम ही गाता है, केवल ईश्वर ही भाता है।।
अपना दुःख-दर्द छिपाता है, … … …।
हाथ छड़ी और कमर झुकी, चुपचाप अकेला जाता है।-2
दिल उनका-2 टूट जाता है, जब कोई न साथ निभाता है।।
अपना दुःख दर्द छिपाता है, … … …।
जीवन का अंतिम आवर्तन, होता है वृद्ध में परिवर्तन।-2
मोनी कहती-2 सम्मान करो, बुढ़ापा सबका आता है।।
अपना दुःख दर्द छिपाता है, … … …।
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