मार्च, 2023

दिल्ली
ना अपेक्षा करो ना उपेक्षा करो।
अपने कर्मों की केवल समीक्षा करो।
अब करो प्रण कभी पाप हमसे न हो,
हो चुका है जो उसकी परिवीक्षा करो।
दीन मजबूर पर ना सितम हो कहीँ,
सबको समझाओ सबको ही दीक्षा करो।
कोई चोरी करे तो सजा तुम न दो,
आखिर मजबूरी क्या थी अन्वीक्षा करो।
हैं हितैषी जो इसकी मुनादी करे,
वक़्त आने पर उनकी परीक्षा करो।
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