वृद्धावस्था

मार्च, 2023

अनीता मिश्रा
दिल्ली

मत सोचो निरीह निर्बल हो तुम
आत्म बल भरो सबसे सफल हो तुम।।

आहत होना बंद करो अपमान की बाणों से
गर्व करो अपने अतीत के कामों से।।
सर्वस्व लुटा कर मोह में क्यों फंसते हो।
उम्मीद टूटने पर फूट-फूटकर रोते हो।।
उम्मीद ही क्यों करते हो
तुम्हारा ही दूरभि संधि दोष है।
सदैव देखकर आदत लगाया
अब उपेक्षा पर क्यों रोष है।।
सदैव दूसरों के दर्द में दवा बन कर जिए

तब भी वर्तमान में अपमान के घूट पिए।।
क्यों? क्यों? क्यों क्यों???
जो तुम्हें बोझ समझता है
वह है बहुत नादान
तुम्हारे अनुभव के खजानों से
है वो अनजान
नींव को ये भूल चुका है
रंगीन दीवारों पर इतराता है
स्वयं के लिए जीने वाला
स्वयं ही पीठ थपथपाता है।।

टि्वटर, फेसबुक पर केवल ये करते है बातें।
अगर हम ना दिए होते पर्यावरण
विषम हो जाती इनकी रातें।।
तुम दाता हो याचक करता नहीं
हौसला जुटाकर स्वयं उठो
कोई तुम्हारा दुखहर्ता नहीं।।
पंख देकर छोड़ दो उड़ने दो आकाश में
इंतजार की राहे छोड़ो मत बैठो तुम आस में।।

बहुत हुआ अब भूल भुलैया
घर से निकलो बाहर भैया।।
अपनों के लिए बहुत जिए हम
अब अपने लिए जीना है।
किसी की आसरा में रह
न अपमान पीना है।।

समझाने पर भी नहीं समझते
नयन नीर स्वत: ही बहते।।
दशको की तप तपस्या स्वार्थ की कुंड में पिघल गए
हिम बने उम्मीद नयन के रास्ते बह गए।।
आई. ए. लाइफ सेलिब्रेटिंग फाउंडेशन से जुड़कर
बनाए हमदर्द की टोली
कुछ सुने और सुनाएं बनाए प्यार की हमजोली।।
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