सितंबर, 2023

जानकी विहार कॉलोनी,
जानकी पुरम, लखनऊ
जीवन को जीने की भी कला है विशेष मित्र,
बिन घबराए तुम्हे इसे अब जीना है|
थोड़ा सा भी होना नहीं दुःख से हताश कभी,
सुख को छिपाये तम-पट मात्र झीना है|
भय नहीं खाना शत्रुओं से जिन्होंने सदैव,
देके कंटकों का जाल पुष्प माल छीना है|
जग में मिलेंगे तुम्हे प्याले विष के भी कई,
विश्वनाथ सा तुम्हे हलाहल को पीना है||
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