उम्मीद की लौ

मार्च, 2024

अनीता मिश्रा, दिल्ली

जाऐंगे जाऐंगे हम जाऐंगे
सीएलएफ़ हम जाएंगे
हाथों में लेके मशाल
पूछने बुजुर्गों का हाल।।
हम जाएंगे जाएंगे जाएंगे
सीएलएफ़ हम जाएंगे।

बच्चे उड़ गए हैं
अपनी दुनिया में जुड़ गए है
सहलाएंगें सहलाएंगें सहलाएंगें
बुजुर्गों को हम सहलाएंगें
अंत समय में ना होंगे निराश
लौटाऐंगे उनका हम विश्वास
आत्मविश्वास को हम जगाएंगे
जगाएंगे जगाएंगे जगाएंगे
सीएलएफ़ हम जाएंगे।

क्या नहीं किया इन्होंने
सर्वस्व दिया जिन्होंने
इनके त्याग को याद दिलाएंगे
सीएलएफ़ हम जाएंगे।

जीवन के अंतिम पड़ाव में
स्नेह के सुंदर छांव में
उनको हम हसाएऐंगे
सीएलएफ़ हम जाएंगे
अपने लिए जी कभी जिए नहीं
परिजन के लिए खड़े हैं वही
उनके कृत को कृतज्ञता जताएंगें
जताएंगे जताएंगे जताएंगे
सीएलएफ़ हम जाएंगे।

देश के कोने-कोने में जाएऐंगे
अपने बुजुर्गों पर प्रेम बरसाएंगे
सीएलएफ़ के मशाल को आगे बढ़ाएंगे
बढ़ाएंगे बढ़ाएंगे बढ़ाएंगे
सीएलएफ़ हम जाएंगे।

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