जून, 2024

एक बनें हम, नेक बनें हम, संगठित हों
नारा है।
सबसे अच्छा, सबसे प्यारा, भारत देश
हमारा है॥
ऊंच नीच के, भेदभाव से, कभी ना हम
विकसित होंगे।
खुशहाली और समरसता के, पुष्प नहीं
पुष्पित होंगे।
दीप जले, खुशियों का हर घर, यह मेरा
अरमान है।
नमन करूं मैं, उन लोगों को, जो मजदूर
किसान है॥
सदियों से जो, शोषित वंचित, उनकी पीड़ा
दूर करें।
अपने स्वार्थ की पूर्ति खातिर, किसी को
ना मजबूर करें॥
सभी सफल हों, सभी कुशल हों हर होठों
पर हो आनंद।
देश के खातिर जिए मरेंगे, मातृभूमि की है
सौगंध॥
****
