सितंबर, 2024

बाल साहित्यकार, व्यवसाय अध्यापिका (सेवानिवृत)
विवेक विहार, न्यू सांगानेर रोड, सोडाला
जयपुर, राजस्थान
हिन्दी ने जोड़ा सबको,
वसुधैवकुटुंब बनाया है
हिन्दी ने सारे जग में,
अपना ध्वज फहराया है।
कहलाती वैज्ञानिक भाषा,
नियमावली से चलती है
वर्णों की है कथा निराली
बारह कड़ी से बनती है।
एक-एक अक्षर में इसके
शब्दों का भंडार है
देवों की वाणी है इसमें
सरस्वती का वास है।
उच्चारण के अजब तरीके
मुख अवयव हैं काम लिए
कंठ, दंत, तालू, जिव्हा से
तरह-तरह के स्वर निकले।
सबसे सरल बनीं ये भाषा
रंग-बिरंगे रूप खिले
कविता और कहानी पढ़ कर
बड़े-बड़े इतिहास मिले।
देवनागरी लिपि में लिखकर
वेदों का सरलार्थ किया
ग्रंथों को हिन्दी भाषा में
अनुवादित कर मान दिया।
हिन्दी है भारत की भाषा
विश्व पटल पर छाई है
अब बनकर जन-जन की बोली
सबके मन को भाई है।
नमन करें अपनी भाषा पर
गर्व करें अभिमान करें
शब्द नाद चहुं दिस छा जाए
इसका गौरव गान करें।
बने राष्ट्र भाषा भारत की
काम करें सब हिन्दी में
क्योंकि लाखों भेद छुपे हैं
इस हिन्दी की बिंदी में।
*****
