दिसंबर, 2024

अंबिकापुरी, इन्दौर (म.प्र.)
शब्द जीवन हैं
शब्द तैरते हैं हवा में
ऑक्सीजन बनकर
शब्द प्राण वायु हैं
शब्द बहते हैं
नदी में, सागर में
अणु बनकर, परमाणु बनकर
निर्मल जल के साथ
शब्द ब्रह्म हैं
शब्द विचरण करते हैं
नभ में अंतरिक्ष में
लयबद्ध
शब्द ऊर्जा हैं
शब्द धधकते हैं
सभी प्राणियों में
अग्नि बनकर
शब्द गतिमान हैं
शब्द विचरते हैं
पर्वत पर धरा पर
पांचो तत्व
समाए हैं शब्दों में
जिनका अस्तित्व महसूस होता है
मेरी शिराओं में, तंतुओं में
मेरी धड़कन में
शब्द जीवन हैं
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