दिसंबर, 2024

विशाखापत्तनम
मरू स्थल
सूखी घास
सूखे पेड़
सूखी फसल
कटी फसल
फिर
फसल के सूखे ठूंठ
सुखी मिट्टी के खेत
अब
ओस से ढ़की
हरी घास आई
बाजरी की बालियां व पत्तियां आईं।
हाइवे पर भागते ट्रक
बस, ऑटो
और गाड़ी।
गाड़ी से उतरी पांच साल की बच्ची।
अत्यधिक प्यासी,
सुखा गला
सूखे होंठ,
घास पर दौड़ी
नर्म-नर्म घास पर
लौटती रही।
बालियो और पत्तियों पर
पड़ी ओस की बूंदों से खेलती रही।
हाथ पैर गला
पूरी बॉडी की गीली
ओस की बूंदे
छोटी-छोटी
हथेलियों पर
उड़ेलती रही
एक पत्ते से
ओस की बूंदें
हथेली पर उड़ेली
दूसरे पत्ते से..
तीसरे से..
चौथे से..
पांचवें से..
फिर
हथेलियां होठों पर
लगाकर प्योर वाटर पीती रही।
अब
बच्ची तृप्त हुई,
सूखे होंठ
फिर से
मुलायम कोमल,
जुबान गीली हुई।
ओस की बूंदे पीती बच्ची। _2
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