
हिंदी केवल भाषा नहीं,
मन की वह मौन ध्वनि है
जो शब्द बनकर
हमारी आत्मा को छू जाती है।
इसमें माँ की ममता है,
माटी की महक है,
रिश्तों की ऊष्मा है,
और अपनेपन की वह अनुभूति—
जिसे कोई दूसरी भाषा नहीं कह सकती।
आइए, इस विरासत को
केवल एक दिवस तक सीमित न रखें—
इसे बोलें, लिखें, जिएँ
और अगली पीढ़ी को सौंप दें।
क्योंकि हिंदी जीवित रहेगी,
तो हमारी संवेदनाएँ भी जीवित रहेंगी।
हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
