शिक्षक दिवस पर नमन

जिसने अंधकार में दीप जलाया,
जिसने जीवन की राह दिखाई,
गिरकर फिर उठना सिखाया—
आज उन सभी गुरुओं के चरणों में
श्रद्धा से शीश झुकाती हूँ।
पर सबसे पहले स्मरण आपका—
पापा! मेरे प्रथम गुरु।
उँगली थामकर
आपने जीवन की पहली राह दिखाई,
किताबों से बढ़कर
जीवन का पाठ पढ़ाया।
हार में साहस,
दुःख में धैर्य,
और हर परिस्थिति में
संस्कारों को थामे रखना सिखाया।
आज आप दूर हैं मुझसे,
पर आपकी सीख साथ चलती है;
आपकी आवाज़ आज भी
मेरे भीतर हौसला भरती है।
गुरु दूर होकर भी दूर नहीं होते,
उनकी सीख कभी मरती नहीं—
उनकी दी हुई ज्ञान-ज्योति
जीवन भर बुझती नहीं।
पापा, मेरे प्रथम गुरु—
आपको शत-शत नमन।
और उन सभी गुरुओं को,
जिन्होंने जीवन को दिशा दी—
हृदय से नमन।
