
मेरे साँवरिया
कान्हा…
आज जन्म लो
मेरे मन के सूने आँगन में,
जहाँ तुम्हारी प्रतीक्षा
अब प्रार्थना बन चुकी है।
मेरी आँखों के आँसू पढ़ लो,
मेरी चुप्पी में
अपना नाम सुन लो।
मिलन नहीं माँगती तुमसे—
बस विरह इतना देना
कि हर साँस कहे—
श्याम… श्याम…
हर धड़कन में तुम…
हर आँसू में तुम…
हर पल की तड़प में तुम।
दुनिया मुझे भूल जाए,
पर मैं तुम्हें न भूलूँ।
और जब मेरी अंतिम साँस निकले,
तो मेरे होंठों पर
बस तुम्हारा नाम हो—
“मेरे कान्हा…”
राधे… राधे…
जय श्री कृष्ण।
