सितंबर 2026

मैथिली और हिन्दी भाषा में रचना, प्रथम प्रणय, ‘उर्मि’ काव्य संग्रह, शोमारू चैनल के काव्य मंच ‘वाह भाई वाह’, साहित्य अकादमी, मैथिली भोजपुरी अकादमी, कई नेशनल टीवी चैनल पर प्रस्तुति, अनेक सम्मान प्राप्त किया है।
जिसे छिपाना श्रेयस्कर है, उसे छपाकर ख़ुश हैं लोग
जिसे जला जग दीपित होता,
उसे बुझाकर ख़ुश हैं लोग।
जिसे छिपाना श्रेयस्कर है,
उसे छपाकर ख़ुश हैं लोग।।
दान से बढ़कर धर्म न कोई,
कहते सारे वेद-पुराण।
दाएँ से वितरण करना पर,
बायाँ हाथ रहे अनजान।
चार बताशे बाँटे क्या,
ऐलान कराकर ख़ुश हैं लोग।
जिसे छिपाना श्रेयस्कर है,
उसे छपाकर ख़ुश हैं लोग।।
घुट-घुट कर जीती बूढ़ी माँ,
पल-पल सहती है अपमान।
लेकिन तस्वीरों में देखो,
चरण पकड़ सुत बने महान।
रिश्तों की गर्माहट को,
बाज़ार बनाकर ख़ुश हैं लोग।
जिसे छिपाना श्रेयस्कर है,
उसे छपाकर ख़ुश हैं लोग।।
परामर्श तो मिले बहुत,
ना मिटी मलिनता मानस की।
बंद रही सहमति की खिड़की,
सुलह-किरण घर आ न सकी।
अपने लगे पराये, ग़ैरों को
अपनाकर ख़ुश हैं लोग।
जिसे छिपाना श्रेयस्कर है,
उसे छपाकर ख़ुश हैं लोग।।
होती बहस निरर्थक हर पल,
मूल समस्या गौण हुई।
केवल स्तुति-गीत ध्वनित हैं,
समालोचना मौन हुई।
सुनने का सामर्थ्य नहीं, पर
सुना-सुना कर ख़ुश हैं लोग।
जिसे छिपाना श्रेयस्कर है,
उसे छपाकर ख़ुश हैं लोग।।
