सितंबर 2026

अमझेरा धार मप्र
1
मैं बदलना चाहता हूँ,
अब संभलना चाहता हूँ।
तीरगी, वीरानियों से,
बच निकलना चाहता हूँ।
जो रहे हैं राज़ दिल में,
सब उगलना चाहता हूँ।
बर्फ़-सा कब तक रहूँगा?
अब पिघलना चाहता हूँ।
मैं सयाना हो गया हूँ,
अब मचलना चाहता हूँ।
2
मैं खुद से ही प्यार करूँ,
या उनसे व्यापार करूँ?
जितनी साख कमाई है,
उसको तार-तार करूँ?
सबकी नज़रें हैं मुझ पर,
किससे आँखें चार करूँ?
जीत किसी के हिस्से कर,
अपने हक में हार करूँ!
कहना है जो, कहना है…
कितना सोच-विचार करूँ?
