
दीप जले, खुशियाँ मुस्काएँ,
रंग-बिरंगी रंगोली सजाएँ।
मिठाइयों की महक बिखर जाए,
दीपावली हर मन को भाए!
लेकिन… ठहरो! एक सवाल उठाएँ,
क्या केवल घर में दीप जलाएँ?
जब अपनों के मन में अँधियारा हो,
तो रोशन घर भी किस काम का हो?
रूठों को फिर गले लगाएँ,
बिछड़े रिश्तों को फिर अपनाएँ।
भूखे को भोजन, प्यासे को पानी,
यही है दिवाली की सच्ची निशानी!
मिट्टी के दीप रात सजाते हैं,
प्रेम के दीप दिलों को महकाते हैं।
नफ़रत की हर दीवार गिराएँ,
बुझते दिलों में उम्मीद जगाएँ!
एक दीप अपने लिए जलाएँ,
एक दीप किसी और के नाम जलाएँ।
किसी की आँखों में मुस्कान लाएँ,
आओ, प्रेम के दीप जलाएँ!
आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!
