दृष्टिकोण (लघुकथा)
दिसंबर, 2022 स्वाति स्तब्ध है और धीरे-धीरे सोच विचार में डूबी कपूर आँटी की सीढ़ियाँ उतर रही है। ”सत्तर वर्ष
दिसंबर, 2022 स्वाति स्तब्ध है और धीरे-धीरे सोच विचार में डूबी कपूर आँटी की सीढ़ियाँ उतर रही है। ”सत्तर वर्ष
दिसम्बर, 2022 मित्रो! आप मेरे साथ सहमत होंगे कि इस भौतिकतावादी और प्रतिस्पर्धा के युग में मनुष्य स्वार्थी एवं आत्म
“मम्मी, मम्मी जल्दी करो ‘जूम वाली दादी’ आने वाली है कहानियाँ सुनाने” खुशी से चहकते हुए चिंटू बोला। प्रतिदिन शाम
“नर्स बेटा! कुलबीरा आया?” ”नहीं, माँजी!” चौथी बार पूछने पर नर्स ने धैर्यपूर्वक, बीबी हरदेई कौर को उत्तर दिया। “माँजी!
सुप्रसिद्ध कवि श्री हरिवंश राय बच्चन ने क्या खूब कहा है ‘बेचने वाले हवा भी बेच देते हैं गुब्बारों में