दिसंबर, 2025

बसिया, जिला- गुमला, झारखंड,
अभी कल की ही तो बात है जब मैं आम दिनों की तरह सोशल मीडिया से संबंधित एक नेटवर्किंग साइट पर टाईम पास कर रहा था। इसी दौरान अचानक से मेरे मोबाइल फोन पर टें की आवाज आई और साथ में फ्रेंड रिक्वेस्ट का एक नोटिफिकेशन आ धमका। यह रिक्वेस्ट किसी पायल शर्मा का था।
जैसा की अमूमन होता है, यह नाम मेरे जेहन में कहीं नहीं था। पहले तो मैंने इस रिक्वेस्ट को नजरअंदाज कर दिया परन्तु जाने अनजाने उंगलियां क्रियाशील हो गई और इस आमंत्रण को स्वीकार करने के पहले आदतन उसकी प्रोफाइल तक जा पहुंचा। अभी कुछ सोच पाता इसके पहले ही इस सूचना से रूबरू होने का मौका हाथ लगा कि पायल शर्मा की निजी मित्र सूची में कोई नाम शामिल ही नहीं है। एक बार तो इसके फेक होने की शंका हुई परन्तु साथ साथ नया यूजर होने का ध्यान आया। मुझे लगा, नये यूजर के साथ प्रायः यह समस्या होती ही है और चित्र विहीन प्रोफाईल देखकर मेरी आशंका को मानों एक जीवन मिल गया। मुझे लगा नई यूजर होने के कारण उसे फोटो अपलोड करनी नहीं आती होगी या फिर वो संकोची व अति संस्कारी भी हो सकती है। इस उहापोह में आखिरकार मैनें उसके फ्रेंड रिक्वेस्ट को एक्सेप्ट कर ही लिया।
सच तो यही है कि अब तक न जाने कितने अनजानों का फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार किया है तो एक और सही। रिक्वेस्ट स्वीकार करते हुए उसे उपकृत करने की मानसिकता से अभी उबर भी नहीं पाया था कि उसकी ओर से धन्यवाद का मैसेज भी आ गया। यह तो शुरुआत थी क्योंकि बाद के दिनों में मेरे हर स्टेटस को लगातार लाईक व कमेंट्स मिलने लगे। इस नए व अति सक्रिय कद्रदान को पाकर मैं बेहद आह्लादित था। समय के साथ यह सिलसिला आगे बढ़ता चला गया। मेरी इस मंत्रमुग्धता के परिणामस्वरूप अब मेरी निजी जिंदगी से संबधित बातें भी होने लगी, परस्पर पसंद नापसंद भी ट्रेंड करने लगे और कुछ कुछ रोमांटिक शेरो शायरी के पोस्ट भी सामने आने लगे। बात बढ़ते बढ़ते मेरी बीबी तक जा पहुंची कि क्या मैं अपनी बीवी से प्यार करता हूँ? बात और बढ़ी तो सामने से यह सवाल भी आया कि क्या आपकी धर्मपत्नी सुंदर है, क्या वह अच्छा खाना बनाती है, उन्हें आप क्या कहकर पुकारते हैं, कितना मानते हैं वगैरह वगैरह?
सवाल दर सवाल का यह सिलसिला कुछ दिनों तक थमा रहा और मेरी तलाशती नजरों में से कुछ दिन तक वह एकदम नजर ही नहीं आई। कल सुबह अचानक मैसेज बाक्स में एक संदेश आया कि मैं आपके शहर में आई हूँ, क्या आप हम आपस में मिल सकते हैं? छूटते ही मैंने भी हामी भर दी और मैसेज में बातों का सिलसिला फिर से चल पड़ा। यह क्रम जब चल पड़ा तो यह न्यौता भी आ धमका कि आईलैक्स में एक अच्छी सी फिल्म लगी है, मिल भी लेंगे और साथ में मूवी भी देख लेंगे। अब मेरी बारी थी, मैडम आप आ जाइये मेरे घर। साथ में खाना भी खा लेंगे और मेरी सुशील, सुन्दर व समझदार पत्नी से आप मिल भी लेंगी। यकीन मानिए मेरी पत्नी, मेरे बेटे व बहु आपसे मिलकर बहुत खुश होंगे और आप मेरी बीवी के हाथों का बना लजीज खाना खाकर देख भी लेंगी। क्रमशः सार्वजनिक स्थल पर मिलने के तमाम खतरे गिनाए परन्तु मेरा यह प्रस्ताव उसे रास नहीं आया और अपने घर बुलाने की मेरी तमाम कोशिश उसकी जिद के आगे नाकामयाब साबित होती चली गई।
अब तो वह झुंझलाते हुए बोली कि ठीक है, मैं वापिस जा रही हूँ, तुम डरपोक अपने घर पर बैठे रहो। मैं हार चुका था क्योंकि मुझसे मिलने की और तथाकथित दोस्ती की उसे इतनी ही ललक होती तो यह सबकुछ मेरे परिवार वालों के सामने संभव क्यों नहीं था? मेरी इस स्पष्टता के बाद वह कायदे से ऑफलाइन हो गई। दोस्ती के टुटते अहसास के साथ शाम को जब मैं घर पहुँचा तो मेरी पसंद के लजीज पकवानों से सजा डाईनिंग टेबल मेरे इंतजार में पलक बिछाए मुस्कुरा रहा था। डाईनिंग टेबल की इस मुस्कुराहट से हैरान परेशान सवाल तो यह था कि आखिर घर में आ कौन रहा है? पत्नी के जवाब ने इस रहस्य को और गहरा कर दिया कि घर में आपकी दोस्त पायल शर्मा आ रही है। माथा ठनक पड़ा कि कहीं यह वही पायल शर्मा तो नहीं है जो अभी अभी ऑफलाइन होकर मुझे सवालों के घेरे में छोड़कर भाग खड़ी हुई है? रहस्य पर से पर्दा उठने के पहले सवाल और भी बड़ा हो चला कि वह तुम्हें कहाँ मिली, कैसे मिली, कब मिली, उसे कैसे जानती हो आदि आदि?
तसल्ली रखिये साहब, वो पायल मैं ही थी और सोशल साइट पर उसकी छम छम करती शर्मीली बॉक्स के अंदर भी मैं ही थी। पत्नी ने लगभग खिलखिलाकर स्पष्ट किया कि जासूसी मिशन की इस परीक्षा में उसका साजन, उसका जानू और उसका अपना हमसफर इस उम्र में भी मेरिट के साथ पास हुआ है। तंद्रा टुटी तो गत कई दशकों से साये की तरह साथ चलती चिर परिचित आवाज कानों को सुकून दे रही थी, “मेरी बधाई स्वीकार करें मेरे बाबू। आइए इस मेरिट को सेलेब्रेट करते हैं और ठंडा होने के पहले पायल की छमछम करती संगीत के बीच बैठकर इस लजीज से भोजन का नैसर्गिक लुत्फ उठाते हैं।
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