गरिमा

सितंबर 2026

tikeshaw sinha
टीकेश्वर सिन्हा ‘गब्दीवाला’
व्याख्याता (अंग्रेज़ी)
सेजेस विद्यालय – घोटिया, जिला- बालोद (छत्तीसगढ़)

शिक्षक योगेंद्र उइके जी की पिछली मेडिकल रिपोर्ट देखकर डॉक्टर विक्रम सिंह जी को उनके प्रति नाराज़गी महसूस हुई। पर उन्होंने मुस्कुराते हुए बड़े विनम्रतापूर्वक इतना ही बोला—
“सर! अभी तक आपने अपना प्रॉपर ट्रीटमेंट क्यों नहीं करवाया? आख़िर इतना लेट क्यों? आप पर मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है, बट आप एक टीचर हैं; आपको मैं नहीं डाँट सकता।”
उइके जी से गलती तो हुई ही थी; बेचारे चुपचाप बैठे रहे। डॉक्टर कंसल्टेंसी के उपरांत वे क्लीनिक से बाहर निकले। साथ ही, उनके साथ एक जूनियर डॉक्टर प्रशांत भूषण भी बाहर आए। चलते-चलते उइके जी ने डॉ. प्रशांत से पूछा—
“सर! डॉ. विक्रम साहब ने मुझे मेरी गलती पर क्यों नहीं डाँटा? मैं एक शिक्षक तो हूँ ही, लेकिन उनके पास मैं एक पेशेंट के रूप में गया था। वे मेरे डॉक्टर हैं और मैं उनका पेशेंट।”
जूनियर डॉक्टर प्रशांत जी मुस्कुराते हुए बोले—
“सर! आप पेशेंट से पहले एक शिक्षक हैं। वे एक डॉक्टर होने से पहले एक स्टूडेंट रहे हैं। एक शिक्षक के हाथों एक डॉक्टर का निर्माण हो सकता है, पर एक डॉक्टर कभी एक शिक्षक नहीं बना सकता… नेवर!”
आज योगेंद्र उइके जी को एक शिक्षक होने पर विशेष आनंद और गौरव की अनुभूति हो रही थी।

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