मार्च 2026

व्याख्याता (अंग्रेजी)
घोटिया-बालोद (छत्तीसगढ़)
आज निसर्ग सजाते हुए,
आया वसन्त।
सुर्ख वर्ण अरुणाचल पर।
स्वर्णिम किरणें नीलपटल पर।
कुमकुम सी आभा बिखराती,
शीतल हवा स्वतंत्र पहल कर।
चहुँदिशि महकाते हुए,
छाया वसन्त।
मदमस्त हुए तरुदल देख।
रजकण उड़ते हर पल देख।
विहगवृंद की जलक्रीड़ा से,
तरंगित हुए सर-जल देख।
गीत बहारों के गाते हुए,
मुस्कुराया वसन्त।
अमराई पर छाया यौवन।
कोयल के संग गाया उपवन।
टेसू की चटक छवि देख,
सेमल को उकसाया कानन।
देख भौरों को गुनगुनाते हुए,
इठलाया वसन्त।
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