मार्च 2026

स्वरांजलि सेवा संस्थान
वाल्मीकि नगर, पश्चिम चंपारण, बिहार
नारी शक्ति ज्योति बनकर, अंधियारे को मिटाती है।
नारी देवी दुर्गा लक्ष्मी, घर के भाग्य जगाती है।।
पड़ते कदम जहाँ नारी के, घर मंदिर बन जाता है।
माँ की महिमा, ममता का गुण ईश्वर भी दोहराता है।
घर आँगन से नीलगगन तक, नाम का बजता है डंका।
घर मंदिर सा बन जाता है, इसमें ना कोई शंका।।
ममता की गंगा है बहाती, ज्ञान के दीप जलाती है।
सावित्री लक्ष्मी अन्नपूर्णा, सरस्वती कहलाती हैं।।
कभी खेत में हल को चलाती, सीमा पर डट जाती है।
झांसी की रानी वो, लक्ष्मीबाई बनकर आती है।।
कलम से क्रांति लिखने वाली, सपनों को साकार करे।
इनसे बना है उज्जवल भारत, दुनिया जय जयकार करे।।
संघर्षों की धूप में जलकर, घर परिवार चलाती है।
हंस करके दुख दर्द है सहती, खुद भूखे सो जाती है।।
शिक्षा, सेवा, नीति न्याय में, इनका परचम लहराए।
अपनी मेहनत के बलबूते, नई दिशा वो दिखलाए।।
बेटी बहन माँ जीवन साथी, सभी रूप में शक्ति अपार।
नारी के सम्मान बिना तो, क्या धरती और क्या संसार।
साहस धैर्य और परिश्रम, त्याग तपस्या में अव्वल।
हर युग में हर काल में नारी, बनती पुरुषों का संबल।
नारी जब आगे बढ़ती है, देश की उन्नति होती है।
दुख का बादल छा जाता है, जब कोई नारी रोती है।।
महिलाओं के योगदान से, उज्जवल भारत का निर्माण।
डी. आनंद करे जो पूजा, चढ़े सफलता के सोपान।।
*****
