नई पीढ़ी की भाषा

सितंबर 2026

अब्दुल समद ‘राही’
अब्दुल समद राही
शाइर, अध्यक्ष प्रबंध निदेशक शबनम साहित्य समिति
सिलावट मोहल्ला, ढाल की गली,
सोजत सिटी, राजस्थान

शाम को छत पर बैठे दादा रामनाथ अखबार पढ़ रहे थे। पास ही बैठा पोता जिज्ञासु अपने फोन में मस्त, अपनी ही दुनिया में खोया हुआ था। रामनाथ बोले, “क्या बेटा, सारे दिन फोन में लगे रहते हो? आ बैठ, बात करते हैं। क्या हुआ आज ऑफिस में?”

पोते ने मुस्कुराकर कहा, “क्या दादाजी, सारे दिन ऑफिस की बातें! घर पर तो थोड़ा मूड फ्रेश करने दो। अभी एक जरूरी मैसेज का जवाब दे दूँ? बस २ मिनट।” वह २ मिनट, कब २० मिनट बन गए—पता ही नहीं चला। दादाजी ने फिर कहा, “चलो कोई बात नहीं…” और चुपचाप अंदर चले गए।

अगले दिन दादाजी का फोन आया। आवाज धीमी थी, “बेटा, फुर्सत हो तो आ जाना।” पोता ऑफिस के काम में व्यस्त था। उसने सोचा, ‘शाम को मिल लूँगा’ और फोन रख दिया।

शाम को जब वह घर पहुँचा, तो पता चला कि दादाजी को चक्कर आ गया था और वे गिर गए थे। सिर पर हल्की चोट आई थी। पापा घर पर ही थे, तो वे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाकर चेकअप करा लाए और सिर पर पट्टी बँधवा दी।

जिज्ञासु ने घबराकर पूछा, “क्या हुआ दादाजी? सिर पर पट्टी?” दादाजी बोले, “कुछ नहीं बेटा, अब मैं ठीक हूँ।” फिर दादाजी ने प्यार से पूछा, “बेटा, खाना खाया?”

जिज्ञासु दादाजी के पाँव में गिर गया और उनसे माफ़ी माँगने लगा। उसे याद आया कि बचपन में दादाजी ने ही तो उसे पढ़ाया था और एक काबिल इंसान बनाया था। अक्षर जोड़ना, पहाड़े याद कराना, गिरने पर “उठ बेटा” कहना… सब दादाजी की ही तो सीख थी।

यह भी पढ़ें  श्रीनिवास रामानुजन: एक महान गणितज्ञ (प्रेरक व्यक्तित्व)

दादाजी ने धीरे से उसका सिर सहलाया और बोले, “सॉरी मत बोल बेटा! बस एक बात समझ ले—हमारी पीढ़ी की भाषा थी: साथ बैठना, चाय पीना, हाल पूछना। और तुम्हारी पीढ़ी की भाषा है: मैसेज, कॉल, स्टेटस। दोनों में फर्क सिर्फ इतना है कि हमारी भाषा में ‘इंतज़ार’ होता था, और तुम्हारी भाषा में ‘२ मिनट’।”

जिज्ञासु की आँखें भर आईं। उसने तुरंत अपना फोन साइलेंट किया और दादाजी के पास ज़मीन पर बैठ गया। “दादाजी, आज ऑफिस की नहीं, आपकी कहानी सुननी है। वही वाली, जिसमें आप साइकिल पर मुझे स्कूल छोड़ने जाते थे।”

दादाजी हँस पड़े। पट्टी बँधे सिर के बावजूद उनकी आँखों में एक अनूठी चमक आ गई। “अब हुई न बात! यही तो असली कनेक्शन है। नेटवर्क फुल हो या न हो, अपनों से कनेक्शन ड्रॉप नहीं होना चाहिए।”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top