उम्मीदों की धवल किरण

जून, 2025

डॉ. अखिलेश शर्मा
इन्दौर, म.प्र.

आओ फिर से भाग्य जगा‌ लें,
हृदय में अपने भाव सजा लें।

चल पड़ें लंबी डगर पर दृढ़ता से,
सत्कर्मों की ज्योति जला लें।

मानवता की कर के सेवा,
जितना हो सके पुण्य कमा लें।

उम्मीदों की धवल किरण सहेजें,
आशा का इंद्रधनुष सजा लें।

झंकृत हो हर मन की वीणा,
ऐसे सुर और गान बजा लें।
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