जून, 2025

मैं जहाँ मौजूद था
क्यों वहीं ग़ायब रहा।
वो जो मुझ पर मर- मिटा
क्यों मुझे दुश्मन लगा॥
ढूँढ़ते थे जो मुझे
आज ख़ुद हैं लापता
दुश्मनों में सिर्फ़ तू
क्यों मुझे अपना लगा।
कह न पाया कुछ मुझे
बस मुझे देखा किया।
मैं जहाँ पर था नहीं
क्यों वहीं दिखता रहा।
सुन चुके हो चुप्पियाँ
सच बताना क्या सुना।
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