मार्च, 2025

भारतीय रेल भंडार सेवा से सेवानिवृत
मध्यस्थ (भारत सरकार)
गीत मैं किसको सुनाऊँ,
सामने कोई नहीं हो
सहचरी सोई कहीं हो
तरु भरे वीरान जंगल में
खड़ा किसको बुलाऊँ?
कृष्ण ने मुरली धरी है
ताल सोई सी पड़ी है
कान बहरे हो चुके हैं
तीर स्वर का क्या चलाऊँ?
गीत मैं किसको सुनाऊँ?
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मार्च, 2025
