मार्च, 2024

कितना मुश्किल होता होगा
सुबह से उठ कर
सबके लिए चाय नाश्ते की व्यवस्था
फिर पति और बच्चों के लिए
टिफिन पैक करना
घर की साफ सफाई
झाड़ बुहार में बाई के हाथ बंटाना
वाशिंग मशीन में कपड़े
धोने के लिए डाल कर
मशीन चलाना
नहा धो कर
पूजा पाठ करके
अपने लिए एक कप चाय बना कर
अपने पसंदीदा कोने में बैठ कर
चुस्कियां लेते हुए
थोड़ी देर मोबाइल पर
नज़र डालना
और फिर लंच के लिए
तैयारी करना
ओह बगिया में जाने के लिए
तो समय ही नहीं मिला….
लंच के बाद भी आराम कहाँ
रसोई समेटने और बर्तन
मांजने के बाद
बच्चों को होमवर्क कराना
अगले दिन के स्कूल के
लिए उनके बैग तैयार करना
यूनिफॉर्म प्रैस करते करते
शाम को पति के आने का समय
और फिर चाय जलपान
रात के खाने की तैयारी
इस बीच कोई मिलने जुलने वाले
आए तो उनके साथ बैठना भी
जरूरी
फिर बगिया में कब जाएं……
रात में फिर वही
खाना बनाना
खाना खिलाना
बर्तन धोना
रसोई समेटना
सब के बिस्तर लगाना
पीने के लिए पानी रखना
घर के दरवाजे, खिड़की
बंद करना
और थक टूट कर सो जाना
फिर पौधों का क्या….
मगर नहीं
स्त्री को ऐसे ही तो
अन्नपूर्णा, देवी और न जाने
क्या क्या नहीं कहते हैं
वो होती हैं
जादूगरनी
कभी वक्त जरूरत पर
अपने खजाने में से बचत किये गए पैसे
निकाल कर देना
कभी अचानक घर आए
अतिथियों को कपड़े देने हों
या फिर स्वागत सत्कार करना
वो बिना किसी को बताए
बिना किसी को तकलीफ दिए
सब कर लेती हैं
और
इसी तरह
पता ही नहीं चलता कि कब
सुबह जब सब सो रहे होते हैं
या
गैस पर कुकुर रख कर
वाशिंग मशीन में कपड़े डाल के
नाश्ते के बाद अपने चाय का कप
ले कर वो
पंहुच जाती हैं अपने प्यारे
पौधों के बीच
क्योंकि वही तो हैं
जो उनकी बात चुपचाप सुन लेते हैं
बहस नहीं करते
ना नुकुर नहीं करते
डांटते चिल्लाते नहीं हैं
वही तो उसके सुख दुःख के साथी हैं
उनको कैसे भूल जाएगी।
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