
दिल्ली
सितंबर, 2025
पिता है
तो नींद है, सपने हैं
पिता है तो सुविधा है नास्तिक होने की
पिता के होते ईश्वर से प्रार्थना जरूरी नहीं
माँ है तो मुमकिन है शाहंशाह होना
माँ के आँचल से बड़ा
दुनिया में कोई साम्राज्य नहीं।
****

सितंबर, 2025
पिता है
तो नींद है, सपने हैं
पिता है तो सुविधा है नास्तिक होने की
पिता के होते ईश्वर से प्रार्थना जरूरी नहीं
माँ है तो मुमकिन है शाहंशाह होना
माँ के आँचल से बड़ा
दुनिया में कोई साम्राज्य नहीं।
****