मार्च, 2025

मां! दिला दो एक पिचकारी
देखो सब खेल रहे हैं।
मार मार कर किलकारी
मां! दिला दो एक पिचकारी।।
लाल नहीं गुलाबी दे दो
हरे रंग की गुलाली दे दो
खेलने की अब तैयारी
मां! दिला दो एक पिचकारी।।
लो बेटा मैं भर दी रंग
खेलो जाके सबके संग।।
खेलकूद के चक्कर में
गिर न जाना टक्कर में।।
मौसम बसंत प्यारी प्यारी।।
मां दिला दो एक पिचकारी।।
जो निज खुशी संग परहित रखता
वही सदा सर्व दिल में टिकता।।
बसंत ने बिखेरी हरियाली
स्वर्णजरित अमिया डाली।।
कोयल कूक लगे निराली
महुआ टुभके प्यारी प्यारी
मां दिला दो एक पिचकारी।।
रक्त रवि संग संध्या बेला
खुशबू घुलित पवन करे खेला।।
मदमस्त है हवा बसंती
सर्वत्र कर रही है मस्ती।।
दिवाली गाथा में लौटे राम
रावण का कर काम तमाम।।
होली की गाथा मुझे ना आती
नानी भी ना मुझे सुनाती।।
तुम ही सुना दो मम्मी प्यारी
मां! दिला दो एक पिचकारी॥
हिरण कश्यप दानवराज
आतंकित जिससे था समाज।।
अपने को कहता भगवान
जपने को ना कहता राम।।
नागलोक जीत लिया कयाधु
आतंकित थे सभी साधु।।
विष्णु भक्त कयाधु की
थी सुन्दरता न्यारी न्यारी।।
मां दिला दो एक पिचकारी।।
विष्णु की थी वह भक्त
चुपके चुपके पूजा में रत
जननी बनी तो पुत्र प्रहलाद
जिसको करती थी आह्लाद।।
पर प्रहलाद हुआ विपरीत
ना निभाया दानव रीत।।
हर क्षण भजन की तैयारी।।
मां दिला दो एक पिचकारी॥
क्रोधित हुआ दानवराज
हिल उठा उसका ताज।।
प्रहलाद मौत का ढूंढा उपाय
हर पल विष्णु हुए सहाय।।
अंत बुलाया होलिका बहन
चली जो करने प्रहलाद दहन।।
अग्नि चिता पर गई बैठ
वरदान का था उसे ऐंठ।।
धू धू करके जली होलिका
देखती रह गई टोलिका।।
हर्षित हो गई कयाधु नारी
मां! दिला दो एक पिचकारी॥
हिरण कश्यप को था अभिमान
अमर होने का था गुमान।।
क्या था उसे मिला वरदान?
क्या मारे नहीं भगवान?
वह दिन में ना मरेगा ना रात
ना सुबह ना शाम
आकाश में मरेगा ना पाताल
ना नर मारेगा ना बेताल।।
ना देव ना दानव
ना गंधर्व ना मानव।।
इसी से गर्वित अत्याचारी
मां! दिला दो एक पिचकारी।।
फिर लिए विष्णु अवतार
नर्सिंग निकले खंभ फार।।
नाखून से प्रभु किए संहार
मच गया दानव में हाहाकार
काले बादल छंट गए धरती से
अंकुरण हुई परती से।।
बह चली राम नाम की बयारी
मां! दिला दो एक पिचकारी।।
ऐसा रंग बनाओ मैया
लगा सबको मैं बनू कन्हैया
फिर ना काले बादल झूमे
दानव दल कभी ना घूमें।।
वर्षा हो प्रेम रस की
काम ना हो प्रभु दरस की।।
खिले फूल प्यारी प्यारी
मां दिला दो एक पिचकारी।।
****
