भैया-दूज

सितंबर, 2022

पं. व्रतराज दूबे ‘विकल’
शांति नगर, बेतिया, बिहार

पुरुष नार दो तत्व हैं, इस दुनिया के मध्य।
एक दूसरे के लिए, दोनों रहें अवध्य।।१।।
एक तत्व दो रूप हैं, ब्रह्मा के हैं अंश।
दोनों करते कामना, उभय रहे अवतंस।।२।।
नारी का गुण है यही, रहती सदा उदार।
है जिम्मेदारी यही, करती सबसे प्यार।।३।।
धनतेरस धनवंतरी, चतुर्दशी हनुमान। अमावस्या को लक्ष्मी, आती शक्ति महान।।४।।
गोवर्धन प्रतिपदा को, बन आते भगवान।
भ्रातृ द्वितीया को प्रकट, होते चंद्र सुजान।।५।।
पाँच दिनों का पर्व है, जिसका बहुत महत्व।
इसमें ही संसार के, मिलते सारे तत्व।।६।।
रोग हरें धनवंतरी, बल देते हनुमान।
धन देती है लक्ष्मी, दें गोवर्धन ज्ञान।।७।।
सुख देते हैं चंद्रमा, जीवन होता धन्य। सुखदाता संसार में, है ना कोई अन्य।।८।।
पाँच दिनों का पर्व यह, है पर्वों का प्राण।
मन से जो करता इसे, पा जाता कल्याण।।९।।
जो करता इस पर्व को, श्रद्धा से प्रतिवर्ष।
उसके घर रहता सदा, हर्षित होकर हर्ष।।१०।।
रेंगनी का काँटा कहे, ले गीतों की गूँज।
नारी जीवन मृत्यु है, बोले भैया दूज।।११।।
बहना ही शापित करे, बहना दे आशीष।
भैया राजा बन रहो, जीओ लाख बरीस।।१२।।
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