दिसंबर, 2023

श्रवण जैसा पुत्र धरा पर, इस जग में है आया।
इसी धरा पर आज पूत ने, माँ-बाप को है रुलाया-2 ।।
1. समय का पहिया ऐसा बदला, माँ-बाप को यातना देते।
धन की लालच में पर कर, वृद्धाश्रम छोड़ देते।।
धन्य वह पूत जो कंधे पर, माँ-बाप को तीर्थ कराया।
इसी धरा पर आज पूत ने, माँ-बाप को है रुलाया।।
2. तालाब से पानी भरकर, लकड़ी जंगल से लाता।
सुबह उठकर माँ-बाप के, चरणों में शीश नवाता।।
धन्य वे माता-पिता हैं जो, श्रवण सा बेटा पाया।।
इसी धरा पर आज पूत ने, माँ-बाप को है रुलाया।।
3. माँ-बाप की है अभिलाषा, फिर से श्रवण पूत आ जाये।
वृद्धाश्रम से माँ-बाप को, घर वापस ले आये।
माँ-बाप को जिसने सताया, सुख से वह रह नहीं पाया।।
इसी धरा पर आज पूत ने, माँ-बाप को है रुलाया।।
4. ज़िम्मेदारी से मत भागो, माता-पिता भगवान हैं।
इनका आदर, सम्मान करो, यही मोनी का अरमान है।
माँ-बाप का कष्ट देखकर, मोनी का दिल भर आया।
इसी धरा पर आज पूत ने, माँ-बाप को है रुलाया।।
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