दिसंबर, 2023

ग्राम+ पोस्- कोबरा, जिला- चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
सारी उमर सोता रहा,
पर नींद नहीं आई,
बहुत गुस्सा आता रहा,
देखकर उसकी रुसवाई!
कोहबर सा जीवन मेरा,
इंतजार था उसका कि,
आएगी दुल्हन बनकर,
पाऊंगा हास-परिहास उससे!
सजी थी सुहाग सेज,
फिर भी वह नहीं आई,
बनकर सुहागिन दुल्हन,
भर लेगी आगोश में, नहीं आई!
थक गया हूं सोते-सोते,
नींद का इंतजार करते-करते,
उस नींद से सभी डरते,
पर हम तो आमंत्रित करते!
आजाओ निंदिया प्यारी,
चिर निद्रा से है सुख भारी,
भूलकर थकान मैं अपनी सारी,
ले लूं सुखमय निंदिया भारी!!
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