मार्च, 2024

माता-पिता के चरणों मे संसार है,
वृद्धजनों की सेवा ही संस्कार है….२
न जाने उसने, कितने जुल्मों सितम झेला
बिना थके हारे, उसने हमको पाला….२
हमको उनका आदर और सत्कार करना है
वृद्धजनों की सेवा ही संस्कार है……..
परिवार व समाज की बुनियाद हैं
गहरी सोच, अनुभव के भंडार हैं ….२
हमको उनका साथ निभाना है
वृद्धजनों की सेवा ही संस्कार है……..
सभ्यता- संस्कृति के संरक्षक हैं
देश और समाज की वे शान हैं ….२
हमको उनका सम्मान दिलाना है
वृद्धजनों की सेवा ही संस्कार है……..२
माता-पिता के चरणों मे संसार है।
