हाथों की लकीरे

सितंबर, 2024

संगीता अजय दरक माहेश्वरी
मनासा जिला नीमच


हाथों की लकीरों को हाथों में रहने दे,
है मंजूर, तकदीर को जो होने दे,
मुकद्दर से जो मिलता है,
वो समेट लिया कर।

आरजुएं इतनी भी अच्छी नही होती,
पढ़ले तकदीर हर कोई हमारी,
इतनी सस्ती भी नही होती।

वक्त से पहले और नसीब से ज्यादा
किसी को मिलता नही,
काँटों के बिना गुलशन कभी
महकता नही।

जो बैठे है तकदीर को पढ़ने वाले,
पूछो उनसे अपनी किस्मत का हाल।

रख भरोसा तू नेक काम किये जा
तकदीर पूछेगी तुझसे बता
तेरी रजा क्या है।
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