दिसंबर, 2024

पटना (बिहार)
सदैव अच्छा इंसान बन कर अपनी अच्छाई दिखाईये।
अपने साथ चलते राहगीरों का हौसला बढ़ाईए।
झूठ फरेब धोखा फैल रहा बड़ी तेजी से
आप सच्चाई दिखाईये।
टालने के बहाने सबको अपना ना कहिए।
सिर्फ समय बिताने को साथ ना रहिए।
जब कोई दोस्त आपका रुठ जाये आपसे ही
आप उसे बैठा हृदय सागर के लहरों पर
प्रेम की गहरायी दिखाईये।
अँधेरा जहाँ वहाँ दीपक जलाईये।
सूखे बागों में कुछ फूल लगाईये।
कहीं कोई अकेला थका सा गर होगा
उसे जरा अपनापन दिखाईये।
अपने कदमों को नए मोड़ पर नयी राह दीजिए।
पुराने अपने फैसले पर नयी आगाज कीजिये।
जो लगे अजनबी कोई अपना-सा तो
उसे थोड़ा-सा सुकून का विश्वास दीजिए।
कभी अपने संघर्षों के किस्से सुनाया कीजिए।
उलझने परेशानियां अपने हिस्से की बताया कीजिए।
वक्त अपने लिये ही कभी मिलता नहीं
कभी खुद को खुद से मिलवाया कीजिए।
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