पहचान हिंदी

सितंबर, 2025

डॉ. वर्षा महेश ‘गरिमा’
आईआईटी बॉम्बे, पवई, मुंबई

मान है अभिमान हिंदी
बन गई पहचान हिंदी
विश्व को अब भान है
कि भारत माँ के प्राण हिंदी।

जनित इससे हर कृति
ललित इसकी संस्कृति
गूंजती है वीणा हिंदी की
हिंदी की करो मन से भक्ति।

हृदय में बसती मातृभाषा है
राष्ट्रीयता को संजोती
राजभाषा है
मेरे-तेरे मन की सहज अभिव्यक्ति
हिंदी सभी को अच्छी लगती।

हमारे अस्तित्व की शान है हिंदी
जीवन का प्रथम प्रमाण है हिंदी
जिसने भारत, हिंदुस्तान रचाया
सुभाषित शब्दों की खदान है हिंदी।

आओ मिलजुल कर आवाज़ उठाएं
हिंदी को उचित सम्मान दिलवाएं
विधि, व्यवसाय और व्यव्हार में अपनाकर
हिंदी की गूंज को चहु
दिशा फैलाएं।
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