मैं अपनी नायिका हूँ

vandnakhare
वंदना खरे

मैं अपनी नायिका हूँ

पथ में काँटे मिलें अगर,
तो पग रुकने न दूँगी।
अँधियारे के आँचल में भी,
अपनी ज्योति चुनूँगी।

दुःख ने जो दीप जलाया है,
उससे राह सजाऊँगी।
टूटे सपनों की राखों से,
नव स्वप्न फिर बनाऊँगी।

न दया माँगूँ, न सहारा,
अपना आकाश स्वयं चुनूँगी।
गिरकर भी मुस्काती उठकर,
हर सीमा से आगे बढ़ूँगी।

मैं मौन नहीं—एक स्वर हूँ,
मैं आँसू नहीं—अंगार हूँ।
किसी कथा की छाया नहीं—
मैं अपनी ही नायिका हूँ।

यह भी पढ़ें  वो होली तब की… और आज की होली

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top