
गुरुग्राम, हरियाणा
मार्च 2026
दूध की बोतल और पालने के बीच भागने वाली माँ
स्कूल बस, टिफिन और होमवर्क के बीच
पसीना बहाने वाली माँ
अब फुर्सत में है
हमारी बीमारी में नींद से
आँखें चुरा
रात भर हमें थपथपाने वाली माँ
अब फुर्सत में है।
हमारे सपनों को साकार करने में
हमारा संबल बनने वाली माँ
अब फुर्सत में है।
लेकिन आज इस फुर्सती माँ
के लिये
किसी को फुर्सत नहीं
समेटती है स्वयं को खुद ही
जब जब टूटकर बिखरती है।
अब बैठी बैठी यादों से
बतियाती है
स्वयं को नित समझाती है
दे दिये पंख परिन्दें उड़ा
आयी हूँ
अपने से कहीं दूर चली गयी थी
आज अपने पास फिर
लौट आयी हूँ
आपने पास फिर लौट आयी हूँ।।
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