मार्च 2026

चित्रकार
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
उम्र की दहलीज यादों से बुहार लेते हैं,
जब भी दिल फरियाद करे तुमको पुकार लेते हैं।
ज़िन्दगी भर कोई तन्हा ना रहे मुहब्बत से,
हम मुहब्बत को मुहब्बत से सँवार लेते हैं।
मेरी किस्मत में उजाला ना सही लेकिन हम तो,
तीरगी में भी उजालों को निहार लेते हैं।
वो भला मासूमियत अपनी कहे किसे जाकर,
जो बहारों से भी कुछ रिश्ते उधार लेते हैं।
मैं तो दरिया था मुहब्बत का नेकी कहाँ डालूँ,
अब समन्दर भी किनारों से पगार लेते हैं।
मेरी उजड़ी हुईं तमन्ना मुझ से ही लिपट जाओ,
तू भी ले लेना जो कुछ ये कहार लेते हैं।
मेरी काई से भरी थी ज़िन्दगी कभी यारो,
हम तो सोने को भी अगनी में निखार लेते हैं।
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