सितंबर 2026

मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार
फैशन के मकड़जाल में फँस गया हिंदुस्तान,
पश्चिमी फैशन पर कर रहा आज यह गुमान।
अपने वजूद को भुला दिया है इन सब नादानों ने,
खोल बैठा है जग में नई-नई फैशन की दुकान।
विद्वानों की बस्ती में विद्वान हैं जहाँ कद्रदान,
बेईमानों की नगरी में बेईमान हैं मेहरबान।
शैतानों से जग में परेशान हैं आज इंसान,
नए युग के नए अरमान लेकर आया है यह जहान।
हर गली, हर नुक्कड़ पर खुली है फैशन की दुकान,
रंग-बिरंगे परिधानों से सज गए हैं उनके प्रतिष्ठान।
आधुनिकता के दरिया में बह गए हैं सब अनजान,
न है इनको अपनी वेशभूषा पर थोड़ा भी अभिमान!
बिगाड़ ली है सेहत, बिगड़ा है सबका खान-पान,
मदिरालय के शरबत को समझ रहे हैं यह शान।
कैसे हो इस रोग से वंशज का कोई भी निदान?
बीमारी को बुलाते हैं, फिर हो जाते हैं गुमनाम।
नकलची होने में भी मेरा देश जग में है महान,
लुप्त हो रही है अपनी सांस्कृतिक विरासत की पहचान।
पश्चिमी देशों से आया है यह अजीबो-गरीब तूफ़ान,
उजाड़कर रख दिया है हमारी सभ्यता का नाम!
