दिसंबर, 2025

शाइर, कवि, पत्रकार
सिलावट मोहल्ला, ढाल की गली,
सोजत सिटी, राजस्थान
बुजुर्ग हमारे
घर के रक्षक
संस्कृति के संरक्षक।
दया, धर्म
क्षमाशीलता
के संवर्धक।
क्या इनका
बूढ़ा होकर
जिंदा रहना पाप है।
फिर क्यों?
छोड़ दिया इन्हें अकेला।
बुढ़ापे की लाठी
समझा था जिन्हें
वे ही वृद्धाश्रम की
सीढ़ियों पर छोड़ गए।
कल हमारा
बुढ़ापा आएगा
हमारा बेटा-बहू
इसी तरह
हमें सताएगा।
बुजुर्ग
नहीं होते खार
वे देते
सभी को प्यार
ज्ञान के होते भण्डार
इनका करो सत्कार।
बुजुर्ग धरोहर है
जगत करें मान-सम्मान
इनके आशीर्वाद से ही
होता जीवन कल्याण।
*****
