सितंबर, 2025

हैदराबाद (तेलंगाणा)
अपनी भाषा
अपनों की भाषा
सपनों की भाषा
अपने सपनों की भाषा
माँ की भाषा
ममता की भाषा
मैत्री की भाषा
अस्तित्व की भाषा
अपनत्व की भाषा
एकांत में मौन की भाषा
चिन्ता में चिन्मयता की भाषा
मानव व्यथा की भाषा
प्रेम कथा की भाषा!
‘ककहरा’ से काव्य पाठ तक
उत्कर्ष कराने वाली भाषा
“वृद्धोपनिषद्” बन
विश्राम दिलाने वाली भाषा!
संवादों से संस्कारों की ओर
पूर्वाग्रह से सत्याग्रह की ओर,
मोड़-मोड़ पर,
शहजादी बन राह दिखाती,
बनी है आज़ादी की परिभाषा!
किलकारी का हार पहनाती,
लोकगीत की लोरी सुनाती
संस्कृति का संप्रेषण कर
कल्लोलित मन को
आलोकित करती
रामकथा बन राह दिखाती
कृष्ण काव्य बन प्रेम सिखाती
हिन्दी, जिस भाषा का नाम है
भावों का संवाहक है!
अपने सपनों की यह भाषा
शैशव गीत से बने विश्व गीत
यही हमारी अभिलाषा!!
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