ग़ज़लें

जून, 2026

naveen mathur pancholi
नवीन माथुर पंचोली
अमझेरा धार मप्र

1
हम किसी से अगर नहीं मिलते।
लोग सब इस क़दर नहीं मिलते।

मंज़िले आसपास हैं लेकिन,
रास्ते मुख्तसर नहीं मिलते।

चाहते हैं उड़े ऊंचाई तक।
पर परिंदों से पर नहीं मिलते।

और कुछ साथ-साथ रह लें अब,
साथ ये उम्र भर नहीं मिलते।

आज ठहरेंगे हम सरायों में।
दूर बस्ती में घर नहीं मिलते।

दूर जाना है जब अकेले ही,
राह भर हमसफ़र नहीं मिलते।

2
साथ जैसे किताब रखते हो।
ख़ूब हाज़िर जवाब रखते हो।

रोशनी की तुम्हें कमी कैसी,
पास जब महताब रखते हो।

कब कहाँ है हमें लेना – देना,
सब ज़ुबां पर हिसाब रखते हो।

पास गुजरो हवा महक जाए,
साँसे अपनी गुलाब रखते हो।

हम इसी बात के रहे कायल,
दोस्ती लाजवाब रखते हो।
*****

यह भी पढ़ें  हिन्दी का अपना होगा

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top