जून, 2026

पीतमपुरा, दिल्ली
जीवन-झरने से अगर सुनना है संगीत,
राग-द्वेष का आयतन कम कर दे तू मीत।
सुख दुख मान अपमान हो नफ्ऱत पीड़ा प्यार,
आता है सब लौटकर देते जो हर बार।
बच्चों सा निश्छल अगर हो अपना व्यवहार,
प्रेम-प्यार की हर समय हों हम पर बौछार।
जब जीवन की नाव पर लदता ज़्यादा भार,
रहती डावाँडोल वो नहीं पहुँचती पार।
धन दौलत को देखकर गढ़ते जो अनुबंध,
होते फ़़ौरन ही वहाँ तार-तार संबंध।
अच्छे रिश्तों के लिए रखना इतना ध्यान,
इक दूजे को दीजिए, पूरा पूरा स्थान।
संबंधों को चाहिए, देखभाल की खाद,
उदासीनता से सदा होते ये बरबाद।
संबंधों के बीच में जो आ गई दरार,
बिना गँवाए ही समय उसको करिए पार।
संबंधों की नींव को मत कर तू कमज़ोर,
जो कहना चुपचाप कह बिना मचाए शोर।
योगदान की सभी के चर्चा कर दिल खोल,
अच्छे रिश्तों के लिए, मीठे मीठे बोल।
मित्रों से जो भूल हों मत दो उनको तूल,
योगदान उनका सदा मन से करो क़बूल।
छोटी मोटी ग़लतियाँ करो नज़रअंदाज़,
कोई भी इससे नहीं होता है नाराज़।
घर में तेरे साथ जो रख उनका तू ध्यान,
उजड़ गया घरबार तो है बेकार मकान।
मिला आपका साथ जो प्रेम प्यार विश्वास,
मुझको तो आने लगा जीवन अब कुछ रास।
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