चलो फिर गीत गाते हैं

जून, 2026

प्रियम्वदा
प्रियम्वदा, लखनऊ

(सीएलएफ़ गीत)
चलो फिर गीत गाते हैं,
जरा फिर मुस्कुराते है,
है तन का जोर बेशक कम,
उमंगो को जगाते हैं,
चलो फिर गीत गाते हैं।

डगर जो हम चले अब तक,
नहीं थी सेज फूलों की,
मगर यादों को हम अपने,
गुलिस्ताँ से सजाते हैं,
चलो फिर गीत गाते हैं।

दिया जो जुग जमाने को,
वही क्या हद हमारी थी,
अगर दिल में खलिश कोई,
जरा फिर दम लगाते हैं,
चलो फिर गीत गाते हैं।

जो पल हमने गुजारे हैं,
है जीवन की बड़ी पूँजी,
भरा अनुभव का वह थैला,
युवा को बाँट आते हैं,
चलो फिर गीत गाते हैं।

ना सोचें अब बुढ़ापा है,
ना देखें राह आखिर की,
बची जितनी है जिदग़ानि,
सफल उसको बनाते हैं,
चलो फिर गीत गाते हैं।

चलो फिर गीत गाते है,
सी एफ एल का संग पाते है,
चलो फिर गीत गाते हैं।

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